रविवार, 29 जुलाई 2012

बाबर की मजार बनाम बाबरी मस्जिद

जब इस्लाम अफगानिस्तान में पहुँचा , तो अफगानिस्तान के लोग अरब साम्राज्यवादी शक्तियों द्वार छल - प्रपंच से किये गये युद्ध में हार गये । लेकिन उन्होंने अपने पूर्वजों को विस्मृत नहीं किया था । आज जो अफगानिस्तान में तालिबान है , सारे बुद्ध की प्रतिमा तोड़ रहे हैं , ये तालिबान तो वैश्विक अरब साम्राज्यवादी मानसिकता और पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर कट्टरपंथी बन गये हैं । वहां के अफगानों में इतने दिनों तक यह नहीं था । लेकिन वहाँ का अफगान क्या सोचता है ? मोहनदास गांधी की पुत्रवधु ( मोहनदास गांधी के दत्तकपुत्र फिरोज खान गांधी की पत्नी । ) श्रीमती इन्दिरा गांधी जब अफगानिस्तान गयी , तो वहाँ पर उनको लगा कि यहाँ बाबर की मजार है । उन्होंने कहा कि इतना बड़ा सम्राट हुआ , साम्राज्य संस्थापक हुआ , चलो उसकी मजार पर पुष्प चक्र चढ़ाना चाहिए । उन्होंने कहा , मैं बाबर की मजार पर पुष्प चढ़ाना चाहती हूँ । अफगानिस्तान की सरकार बड़ी घबरायी , कभी सोचा भी नहीं था , कोई आकर पुष्प चक्र चढ़ायेगा । पता लगाया , तो एक कब्रिस्तान में एक कोने में उसकी मजार थी । इतनी टूटी - फूटी अवस्था में थी , कि झाड़ - झंखाड़ खड़े हो गये थे । भारत की प्रधानमंत्री आने वाली हैं , इसलिए उन्होंने उसे साफ करके देखने लायक बनाया । प्रधानमंत्री गयी , वही पुष्प चक्र चढ़ाया । जब जाने लगी तो उनके साथ एक अधिकारी था , उसने वहाँ के कब्रिस्तान के प्रमुख से पूछा , बाबर इतने बड़े एक साम्राज्य का संस्थापक हुआ और उसकी मजार इतनी टूटी फूटी अवस्था में ? तो उसका उत्तर था - वह कौन अफगान था ! वह अफगान नहीं था , तो हम उसकी चिन्ता क्यों करें ? अफगानिस्तान का मुसलमान , मुसलमान होते हुए भी बाबर को अपना नहीं समझता । दुर्भाग्य की बात है कि अपने देश भारत में मुसलमानों का एक वर्ग बाबर को अपना पुरखा मानता है और उनके वोटों के लालची राजनीतिज्ञ भी बाबर को अपना पुरखा मानते हैं , इसलिये उसने राम मन्दिर तोड़कर वहाँ पर जो मस्जिदरूपी ढ़ाँचा बनाया था , उसको बाबरी मस्जिद कहते है ।
- विश्वजीत सिंह ' अनंत '
सांप्रदायिकता विरोधी मोर्चा ( रजिस्टर्ड )

1 टिप्पणी:

  1. मोहम्मदपंथी जहाँ जहाँ भी गये लूट आंतक और अपने घृणित पंथ इस्लाम को ले गये और मिस्र ग्रीक अफगान इंडोऐशिया येरुशलम इरान इराक आदी सभ्यता को नष्ट करते गये अब इनका लक्षय भारत और अमेरिका है

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