शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

क्या भारत का पुनः विभाजन होगा ?


मित्रों आज सुबह समाचार पढा कि जम्मू कश्मीर में पीपुल्स डैमोक्रेटिक पार्टी ( पी. डी. पी. ) के विधायक निजामुद्दीन भट्ट द्वारा राज्य के संविधान में संशोधन करवाने हेतु विधेयक प्रस्तुत कर राज्य के संविधान की धारा 147 के उपबंध - 2 के स्थान पर नई धारा बनाने की मांग की । इस विधेयक के पारित होने से विधानसभा सदस्यों पर लगा वह प्रतिबंध समाप्त हो जायेगा जिसके अन्तर्गत वे खण्ड - 3 में संशोधन नहीं कर सकते क्योंकि इसमें जम्मू कश्मीर को भारत का अटूट अंग करार दिया गया है । यह विधेयक यदि पास हो गया तो जम्मू कश्मीर भारत का अटूट अंग नहीं रहेगा ।
भारत में आज फिर से विध्वंसकारी शक्तियों तथा साम्प्रदायिक वोटों के भूखे नेताओं के कारण 14 अगस्त 1947 की सी स्थिति बनती जा रही है । उन दिनों भारत भर के अरबपंथी समाज ने मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में अलग देश की मांग की थी । पंजाब से बंगाल , आसाम तक धरने , प्रदर्शन , नारे , रैलियाँ निकल रही थी । डायेरेक्ट एक्शन की धमकियां दी जा रही थी । कलकत्ता और नवाखली में खून बहाया जा रहा था , पंजाब जल रहा था । आखिर हिन्दु - मुस्लिम के आधार पर पाकिस्तान बन ही गया ।
मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था " भारत के विभाजन का बीज तो उसी दिन पड़ गया था , जिस दिन प्रथम हिन्दू इस्लाम में दीक्षित हुआ था । "
इसी अलगाववादी सोच के आधार पर 14 अगस्त 1947 को अधिकारिक रूप से भारत को विभाजित कर दिया गया । परन्तु यह भारत का प्रथम विभाजन नहीं था । इसके पहले भी भारत के अनेक बार टुकड़े किये गए । सर्वप्रथम 26 मई 1739 को दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह अकबर ने ईरान के नादिरशाह से संधि कर अफगानिस्तान उसे सौंप दिया । आने वाले समय में क्रमशः नेपाल , भूटान , तिब्बत , ब्रह्मदेश ( म्यांमार ) और पश्चिमी एवं पूर्वी पाकिस्तान ( बांग्लादेश ) भारत से अलग कर दिए गए । स्वतंत्रता पश्चात सन् 1947 और सन् 1962 में आज के पाक अधिकृत लद्दाख को तत्कालीन राज्यकर्ताओं ने थाल में सजाकर पाकिस्तान और चीन को दे दिए । सिकुड़ते जाने की इस यात्रा पर पूर्ण विराम नहीं लगा है । चीन अब अरूणांचल प्रदेश पर अपना अधिकार जता रहा है । कश्मीर घाटी को तोड़ने के प्रयास चल रहे है और करोड़ों बांग्लादेशी घुसपैठिये पूर्वांचल समेत सारे देश पर दृष्टि गड़ाए है ।
साम्प्रदायों में बँटी जनता तथा भ्रष्ट नेता देश की अखण्डता कैसे कब तक सुरक्षित रख सकते है ? ये साम्प्रदायिक तुष्टिकरण की कुनीति तो भारतीयता और भारतीय - दोनों ही की शत्रु है । उदाहरण के लिए पूर्वोत्तर के छः प्रदेश नागालैण्ड , मिजोरम , अरूणांचल , त्रिपुरा , मेघालय और असम में भारतीय सत्ता सही मायनों में कितने प्रतिशत है ? जम्मू कश्मीर राज्य किन अर्थो में भारतीय गणराज्य का राष्ट्रीय अंग है ? इन राज्यों के नागरिक कितने प्रतिशत ऐसे है जो अपने को भारतीय कहते है ? इन प्रदेशों में हिन्दू समाज का कोई व्यक्ति शक्ति सम्पन्न नेतृत्व क्यों नहीं कर सकता ? वहाँ केन्द्रिय सरकार द्वारा भेजे गये वरिष्ठ अधिकारी गोली से क्यों मारे जाते है ? क्या यह सच नहीं है कि यदि उन प्रदेशों में भारी सैन्य छावनियाँ न हों तो अब तक ये मुस्लिम व ईसाई बाहुल्य प्रदेश चीन एवं पाकिस्तान में जा मिलेंगे । भारतीय सत्ता से विद्रोह का कारण विदेशी मत - मजहब की प्रेरणा नहीं है ? आज भारत में राजनीतिक स्वार्थवश जो साम्प्रदायिक तुष्टिकरण की आंधी चल रही है तो क्या ऐसी स्थिति में भारत का पुनः विभाजन नहीं होगा ?
- विश्वजीत सिंह ' अनंत '

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. शुरुआत तो हो ही गयी है| आप तो जानते ही होंगे कि असम की ६०० एकड़ से अधिक भूमि बांग्लादेश को दान कर दी गयी है|
    कश्मीर तो वैसे ही जल रहा है, साथ ही साथ पूर्वोत्तर राज्यों ने भी विद्रोह की आग पकड़ ली है| ऐसी परिस्थिति में भारत बचा ही कहाँ है?
    स्थिति बहुत भयानक है|

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  3. Sahi kah rahe hain aap .. shuruaat ho chuki hai.
    Main ise share kar raha hu facebook per ....
    Abhar.
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    .

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  4. देखते हैं। वैसे इस बार नेताओं की दुर्गति होनी ही चाहिए।

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