रविवार, 31 जुलाई 2011

महान क्रान्तिकारी शहीद ऊधम सिंह


भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वीर ऊधम सिंह ( राम मोहम्मद सिंह आजाद ) का बलिदान अनुपम एवं प्रेरणीय है और उनकी गणना देश के प्रथम पंक्ति के बलिदानियों में होती है । आम धारणा है कि उन्होंने जलियाँवाला बाग नरसंहार के उत्तरदायी जनरल डायर को 13 मार्च 1940 में लन्दन में जाकर गोली मारी और निर्दोष भारतीयों की हत्या का बदला लिया । लेकिन जनरल डायर तो 1927 में कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर मर गया था , तो फिर ऊधम सिंह ने किसको मारा ! वास्तव में ऊधम सिंह ने माइकल ओडवायर को मारा था , जो जलियाँवाला बांग नरसंहार के समय पंजाब का गर्वनर था ।
ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब प्रान्त के संगरूर जिले के सुनाम गॉव में हुआ था । बचपन में ही इनके माता - पिता का निधन हो गया था और इनका पालन - पोषण अमृतसर के एक अनाथालय में हुआ । अंग्रेजों का शासन था और अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर अमानवीय अत्याचार किये जा रहे थे । 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला बाग का जघन्य नरसंहार ऊधम सिंह ने अपनी आखों से देखा था । उन्होंने देखा कि कुछ ही समय में जलियाँवाला बाग खून में नहा गया और असहाय निहत्थे नागरिकों पर अंग्रेजी शासन का बर्बर अत्याचार और लाशों का अंबार । इस जुल्म को देखकर उनके स्वाभिमान को भारी ठेस पहुँची और उन्होंने जलियाँवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर निर्दयी डायर से इसका बदला लेने की प्रतिज्ञा की । उन्होंने अनाथालय छोड दिया और क्रान्तिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लडाई में शामिल हो गए ।
जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला लेने हेतु 1923 में वह इंग्लैंड गए , परन्तु 1927 में प्राकृतिक कारणों से जनरल डायर की मृत्यु हो जाने के कारण अपना लक्ष्य असफल होने पर 1928 में भारत वापस लौट आए । इंगलैंड से वह एक पिस्तौल साथ लेकर आए थे जिसे अंग्रेज सरकार ने पकड लिया और उन पर मुकद्दमा चला जिसमें उन्हें चार वर्ष के कारावास की सजा दी गई । वह 1932 में जेल से रिहा हुए । वह फिर इंगलैंड पहुँचे और वहाँ 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे । जनरल डायर मर चुका था , किन्तु उसके अपराध पर मोहर लगाने वाला सर माइकल ओडवायर अभी जीवित था । ऊधम सिंह को निर्दोष भारतीयों के जघन्य हत्याकांड का बदला लेना था । उन्होंने अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु एक कार और छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी खरीद ली । तथा ओडवायर को ढिकाने लगाने के लिए उचित समय की प्रतिक्षा करने लगे ।
अंततः वह समय आ गया जब ऊधम सिंह की योजना सफल होनी थी । 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लन्दन के काक्सटन हॉल में एक भारी सभा का आयोजन था जिसमें माइकल ओडवायर भी वक्ताओं में से एक था । ऊधम सिंह बढिया अंग्रेजी सूट पहने , हाथ में एक पुस्तक लिए उस सभा में पहुँच गए । अपनी पुस्तक के पन्नों में कटिंग करके उसमें उन्होंने रिवाल्वर रख लिया था । ओडवायर उठा और उसने अपना भाषण आरम्भ किया । अपनी प्रशंसा करते हुए उसने कहा कि मैंने भारतीयों को सदा के लिए कुचल दिया है और अब वे स्वतंत्रता का नाम लेना भुल जाएंगे । ऊधम सिंह का खून खौल उठा । उन्होंने पुस्तक में से रिवाल्वर निकाला और गोलियाँ चला कर ओडवायर को सभा के मंच पर ही ढेर कर दिया । सभा में भगदड मच गयी पर ऊधम सिंह भागे नहीं । अपनी प्रतिज्ञा पूरी करके वह दृढता से वही खडे रहे और निर्भयापूर्ण स्वर में कहा - ' माइकल ओडवायर को मैंने मारा है । ' ऊधम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके विरूद्ध मुकद्दमा चलाया गया । जब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने राष्ट्रीय एकता की भावना में अपना नाम ' राम मोहम्मद सिँह आजाद ' बताया ।
न्यायालय में उनसे पूछा गया कि वह डायर के अन्य साथियों को भी मार सकते थे , लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया । ऊधम सिंह ने उत्तर दिया कि वहाँ पर कई स्त्रियाँ भी थी और भारतीय संस्कृति में स्त्रियाँ पर हमला करना पाप है । 4 जून 1940 को अंग्रेज न्यायाधीश ने ऊधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया था और फाँसी की सजा सुनाई । इस पर वीर ऊधम सिंह ने कहा था - ' यह काम मैंने किया माइकल असली अपराधी था , उसके साथ ऐसा ही किया जाना चाहिए था । वह मेरे देश को कुचलना चाहता था , मैंने उसे कुचल दिया । पूरे 21 वर्ष तक मैं प्रतिशोध की आग में जलता रहा , मुझे खुशी है कि मैंने यह काम पूरा किया । मैं अपने देश के लिए मर रहा हूँ , मेरा इससे बडा और क्या सम्मान हो सकता है कि मैं मातृभूमि के लिए मरू । ' 31 जुलाई 1940 को वीर ऊधम सिंह को फाँसी दे दे गई और इस तरह इस मृत्युंजयी ने अपना जीवन देश पर बलिदान कर दिया ।
जुलाई 1974 में इस महान बलिदानी की अस्थियाँ भारत सरकार ने इंगलैंड से भारत मंगवाई , जो उनके जन्म स्थान सुनाम में उस समाधि में रखी गई , जो उनकी स्मृति में बनाई गई है ।
अमर शहीद ऊधम सिंह को उनके बलिदान दिवस पर कोटि - कोटि नमन ।
- विश्वजीत सिंह ' अनंत '

2 टिप्‍पणियां:

  1. आज जाकर सही बात का पता चला, कि लंदन में कौन मारा गया था। देखो इस देश भक्त को कितनी ज्ल्द फ़ांसी दे दी गयी,
    और एक कसाब है,
    जिसे आज की खांग्रेस सरकार बचाने पर तुली हुई है।

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  2. उधम सिंह जी पर इस शानदार के लिए धन्यवाद्, यदि आप भारतीय क्रांतिकारियों और स्वाधीनता संग्राम के बारे में रूचि रखते है तो कृपया मेरा ब्लॉग '' hindustan shahido ka '' पढिये , जिसमे दुर्लभ चित्रों का भी समावेश है .
    -अनिल वर्मा , e-mail- anilverma55555@gmail.com

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