सोमवार, 4 जुलाई 2011

गांधी जी नेहरू की दृष्टि में ?


गांधी जी के सर्वाधिक प्रिय व खण्डित भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा - " he really was an awful old hypocrite. " - वह बुड्ढा गांधी सचमुच ही भयंकर कपटी एवं पाखण्डी था । यह पढकर आप चकित होगे कि क्या यह कथन सत्य है - गांधी जी के अनन्य अनुयायी व दाहिना हाथ माने जाने वाले जवाहर लाल नेहरू ने ऐसा कहा होगा , कदापि नहीं । किन्तु यह मध्याह्न के सूर्य की भाँति देदीप्यमान सत्य है - नेहरू ने ऐसा ही कहा था । प्रसंग लीजिये - सन 1955 में कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन भारत आये थे । भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ उनकी भेंट हुई थी । इस भेंट के विषय में वे लिखते है -
सन 1955 में दिल्ली यात्रा के दौरान मुझे नेहरू को ठीक - ठीक समझने का अवसर मिला था । मुझे वह रात याद है , जब गार्डन पार्टी में हम दोनों साथ बैठे थे , रात के सात बज रहे थे और चाँदनी छिटकी हुई थी । उस पार्टी में नाच गाने का कार्यक्रम था । नाच शुरू होने से पहले नृत्यकार दौडकर आये और उन्होंने नेहरू के पाँव छुए फिर हम बाते करने लगे । उन्होंने गांधी के बारे में चर्चा की , उसे सुनकर मैं स्तब्ध हो गया । उन्होंने बताया कि - ' He was talking about Gandhi and his relationship with him, what a great actor Gandhi was, how clever he was with the British, how he cultivated this sinple mystic character because this would appeal to them. 'You know', he said, ' he really was an awful old hypocrite.'
'The Memoirs of the Right Honourable Lester B. Pearson Vol. 2: (Mike) 1948-1957 Edited by John A. Munro and Alex, I. Inglis, University of Toronto Press'
अर्थात वे गांधी के साथ अपने सम्बन्धों के बारे में बात कर रहे थे । गांधी कितना कुशल एक्टर या स्वांगी था ? उसने अंग्रेजों को अपने व्यवहार में कैसी चालाकी दिखाई ? अपने इर्द - गिर्द ऐसा घेरा बुना , जो अंग्रेजों को अपील करे । उसने साधारण फकीर के चरित्र का, जो उन्हें पसंद था, विकास किया । तुम जानते हो ? उन्होंने कहा, वह बुड्ढा गांधी सचमुच ही भयंकर छलि, कपटी एवं पाखण्डी था । " गांधी के अनुयायी कहे जाने वाले नेहरू द्वारा गांधी के सम्बन्ध में ये विचार गांधी के वास्तविक चरित्र को अभिव्यक्त करते है । नेहरू ने गांधी को बहुत निकट एवं गहराई से देखा - समझा था । वह भी उनके विरोधी होकर नहीं अपितु कट्टर अनुयायी होकर । फिर क्या कारण रहा कि वे गांधी जी के बारे में अपने इन दमित विचारों को स्वार्थवश या जनभयवश अपने देशवासियों के सामने प्रकट न कर सके , एक विदेशी प्रधानमंत्री के सामने प्रकट कर दिया ?
मैं आशा करता हूँ कि गांधी के अन्धे भक्त एवं अन्य विद्वान जन इसे ध्यानपूर्वक पढ़ेंगे, और गांधी के चरित्र का वास्तविक मूल्यांकन करेगे । अधिक जानकारी के लिए गांधी से सम्बन्धित अन्य लेख पढ़ें जा सकते है, जो इसी ब्लॉग पर लिखे गये है ।
- विश्वजीत सिंह ' अनंत '

8 टिप्‍पणियां:

  1. HI,
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    Devang Dave.

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  2. आजादी के इतने साल बाद ये जानकारियां खोज निकालने का मकसद क्या है

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  3. "सच की एक छोटी सी चिंगारी झूठ के बडे से बडे पहाड के नष्ट कर देती हैं" - अक्षरशः सत्य

    यही सोच बनी रहे - शुभकामनाएं एवं शुभ आशीष

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  4. सनसनी फैलाने के लिए। अच्छा नाराज नहीं होइए। लेकिन सारा शोध भूतकाल के गाँधी पर टिका लगता है।

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  5. gandhi aur nehru dono hi ek sapnath,ek nagnath the.

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  6. vishwajeet singh ji ye books kaha milengi

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  7. Har insan ke do pahlu hote hai, ek pahlu se duniya dekhta hai aur desare pahlu se khuk ko. bo asa esliye ki bo khud bhi apne hisab se jeena chahta hai aur dusaro ke leye bhi kuch karna chahta hai. sayad yahi kard hoga.

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