बुधवार, 22 जून 2011

अंबाला जेल की कालकोठरी से अमर बलिदानी वीर नाथूराम गोडसे का अपने माता - पिता के नाम अन्तिम पत्र


परम् वंदनीय माताजी और पिताजी ,
अत्यन्त विनम्रता से अंतिम प्रणाम ।
आपके आशीर्वाद विद्युतसंदेश से मिल गये । आपने आज की आपकी प्रकृति और वृद्धावस्था की स्थिति में यहाँ तक न आने की मेरी विनती मान ली , इससे मुझे बडा संतोष हुआ है । आप के छायाचित्र मेरे पास है और उसका पूजन करके ही मैं ब्रह्म में विलीन हो जाऊँगा ।
लौकिक और व्यवहार के कारण आप को इस घटना से परम दुःख होगा इसमें कोई शक नहीं । लेकिन मैं ये पत्र कोई दुःख के आवेग से या दुःख की चर्चा के कारण नहीं लिख रहा हूँ ।
आप गीता के पाठक है , आपने पुराणों का अध्ययन भी किया है ।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया है और वही भगवान ने राजसूय यज्ञभूमि पर -युद्धभूमि पर नहीं - शिशुपाल जैसे एक आर्य राजा का वध अपने सुदर्शन चक्र से किया है । कौन कह सकता है कि श्रीकृष्ण ने पाप किया है । श्रीकृष्ण ने युद्ध में और दूसरी तरह से भी अनेक अहंमन्य और प्रतिष्ठित लोगों की हत्या विश्व के कल्याण के लिए की है । और गीता उपदेश में अपने ( अधर्मी ) बान्धवों की हत्या करने के लिए बार - बार कह कर अन्त में ( युद्ध में ) प्रवृत्त किया है ।
पाप और पुण्य मनुष्य के कृत्य में नहीं , मनुष्य के मन में होता है । दुष्टों को दान देना पुण्य नहीं समझा जाता । वह अधर्म है । एक सीता देवी के कारण रामायण की कथा बन गयी , एक द्रोपदी के कारण महाभारत का इतिहास निर्माण हुआ ।
सहस्त्रावधी स्त्रियों का शील लुटा जा रहा था और ऐसा करने वाले राक्षसों को हर तरह से सहायता करने के यत्न हो रहे थे । ऐसी अवस्था में अपने प्राण के भय से या जन निन्दा के डर से कुछ भी न करना मुझसे नहीं हुआ । सहस्त्रावधी रमणियों के आशिर्वाद भी मेरे पीछे है ।
मेरे बलिदान मेरे प्रिय मातृभूमि के चरणों पर है । अपना एक कुटुम्ब या और कुछ कुटुम्बियों के दृष्टि से हानि अवश्य हो गयी । लेकिन मेरे दृष्टि के सामने छिन्न - भिन्न मन्दिर , कटे हुए मस्तकों की राशि , बालकों की क्रुर हत्या , रमणीयों की विडंबना हर घडी देखने में आती थी । आततायी और अनाचारी लोगों को मिलने वाला सहाय्य तोडना मैने अपना कर्तव्य समझा ।
मेरा मन शुद्ध है । मेरी भावना अत्यन्त शुद्ध थी । कहने वाले लाख तरह से कहेंगे तो भी एक क्षण के लिए भी मेरा मन अस्वस्थ नहीं हुआ । अगर स्वर्ग होगा तो मेरा स्थान उसमें निश्चित है । उस वास्ते मुझे कोई विशेष प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है ।
अगर मोक्ष होगा तो मोक्ष की मनीषा मैं करता हूँ ।
दया मांगकर अपने जीवन की भीख लेना मुझे जरा भी पसंद नहीं था । और आज की सरकार को मेरा धन्यवाद है कि उन्होंने दया के रूप में मेरा वध नहीं किया । दया की भिक्षा से जिन्दा रहना यही मैं असली मृत्यु समझता था । मृत्यु दंड देने वाले में मुझे मारने की शक्ति नहीं है । मेरा बलिदान मेरी मातृभूमि अत्यन्त प्रेम से स्वीकार करेंगी ।
मृत्यु मेरे सामने आया नहीं । मैं मृत्यु के सामने खडा हो गया हूँ । मैं उनके तरफ सुहास्य वदन से देख रहा हूँ और वह भी मुझे एक मित्र के नाते से हस्तांदोलन करता है ।
जातस्यहि धृवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च । तस्मादपरिहार्येथे न त्वं शोचितुमर्हसि ।।
भगवदगीता में तो जीवन और मृत्यु की समस्या का विवेचन श्लोक - श्लोकों में भरा हुआ है । मृत्यु में ज्ञानी मनुष्य को शोक विह्ल करने की शक्ति नहीं है ।
मेरे शरीर का नाश होगा पर मैं आपके साथ हूँ । आसिंधु - सिंधु भारतवर्ष को पूरी तरह से स्वतंत्र करने का मेरा ध्येय - स्वप्न मेरे शरीर की मृत्यु होने से मर जाये यह असम्भव है ।
अधिक लिखने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है । सरकार ने आपको मुझसे मिलने की अंतिम स्वीकृति नहीं दी । सरकार से किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं रखते हुए भी वह कहना ही पडेगा कि अपनी सरकार किस तरह से मानवता के तत्व को अपना रही है ।
मेरे मित्र गण और चि. दत्ता , गोविंद , गोपाल आपको कभी भी अंतर नहीं देंगें ।
चि. अप्पा के साथ और बातचीत हो जायेगी । वो आपको सब वृत्त निवेदन करेंगा ।
इस देश में लाखों मनुष्य ऐसे है कि जिनके नेत्र से इस बलिदान से अश्रु बहेंगे । वह लोग आपके दुःख में सहभागी हैं । आप आपको स्वतः को ईश्वर के निष्ठा के बल पर अवश्य संभालेंगे इसमें संदेह नहीं ।
अखण्ड भारत अमर रहे ।
वन्दे मातरम् ।
आपके चरणों को सहस्त्रशः प्रणाम
आपका विनम्र
नाथूराम वि. गोडसे
अंबाला दिनांक 12 - 11 - 49

6 टिप्‍पणियां:

  1. नाथूराम गोडसे की राष्ट्रभक्ति पर प्रश्न नहीं किये जा सकते. उनका प्रखर चिंतन एवं राष्ट्र के प्रति चिंता जग जाहिर है. आसुरी शक्तियों ने ही उन्हें अपराधी घोषित किया हुआ है . सच्चे अर्थों में वे राष्ट्र के लिए जिए और राष्ट्र के लिए न्योछावर हुए.

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  2. NATHU RAM GODSE KE PRATI AB-TAK JO DHARNA PAAL RAKKHI THI,AB VO BADAL GAYI,AAJ GODSE KE PRATI MAN ME ABHUTPURVE SAMMAN HAI,AAPNE YE PATRA POST KAR AAJ KE YUVAKO KO EK AVASAR DIYA KI VO GODSE KE VYAKTITVA V KRATITVA KO SAMAJH SAKE. DHANYAVAD...!

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  3. स्वर्गीय शहीद नाथू राम गोडसे को शत्-शत् नमन और शत्-शत् वंदन | ऐसे वीर को पैदा करने वाली माता को भी शत्-शत् नमन और शत्-शत् वंदन !!
    स्वर्गीय शहीद नाथू राम गोडसे अमर रहें !! स्वर्गीय शहीद नाथू राम गोडसे ज़िन्दाबाद !!

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  4. Swargiya Bharat Putra Nathu Ram Ji Godsey agar bure insaan hote to Bharat Sarkar unki asliyat ko sabke samne kyui nahi kar rahi. Saayad isliye kyui ki us se Gandhi ji Ki asliyat ki pol khul jaati. Main ye nahi janta ki kaoun acha or kaun bura hai par sacchai agar saamne na ho to kewal ek aadmi ko bura nahi kaha ja sakta hai.

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