मंगलवार, 11 जनवरी 2011

लालचौक पर तिरंगा न फैलायेँ भारतीय युवा - उमर अब्दुल्ला


क्या जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नही है या वह किसी इस्लामिक राष्ट्र का अंग है ! वहाँ के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान से तो यही लगता है । इतिहास की दृष्टि से देखे तो जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिँह ने उसका भारत मेँ विधिवत विलय किया था । लेकिन मोहनदास गांधी द्वारा आधुनिक भारतीय राजनीति मेँ बोये गये मुस्लिम तुष्टिकरण के बीज को जवाहरलाल नेहरु ने सीँचकर विशाल वट वृक्ष और भारत के अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर को भारत का सर दर्द बना दिया । जिसका फायदा अलगाववादी आतंकवादी, उमर अब्दुल्ला जैसी सोच के कट्टर स्वार्थी मुसलमान, भारत सरकार से सम्मान पाने वाली विश्व विख्यात देश की गद्दार लेखिका अरुन्धति राँय और हमारेँ अल्पसंख्यक हित चिन्तक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता उठाते है । तभी तो एक ओर जहाँ जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर के लालचौक ( वह स्थान जहाँ राष्ट्रवादी चिन्तक व राजनेता डाँ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान हुआ था । ) पर राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फैराने की भारतीय युवाओँ की पवित्र भावनाओँ का विरोध करते हुए इससे राज्य के हालात बिगडने का आरोप लगाया । वही दूसरी ओर जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चेयरमैन आतंकवादी मौहम्मद यासीन मलिक ने तो राष्ट्रभक्त युवाओँ को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हेँ लालचौक मेँ तिरंगा नहीँ फैराने दिया जायेगा । गद्दार लेखिका अरुन्धति राँय भी जम्मू कश्मीर को भारत का अंग मानने से इन्कार कर चुकी है । और वर्तमान भारतीय राजनीति वोट बैँक के चक्कर मेँ नपुंसक हो चुकी है । ऐसी स्थिति मेँ क्या हमेँ लगता है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है ।
जम्मू कश्मीर को दिये गये विशेषाधिकार अनुच्छेद 370 के कारण भारतीय नागरिक उसकी रक्षा के लिए अपनी जान तो दे सकता है लेकिन वहाँ पर जमीन का एक टुकडा भी नहीँ खरीद सकता । खुद जम्मू कश्मीर के अन्दर भी जम्मू और लद्दाख सम्भागोँ के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है । अब समय आ गया है कि हम जम्मू कश्मीर समस्या के स्थाई समाधान की दिशा मेँ कुछ ठोस करेँ । आज के स्वार्थी राजनीतिक माहौल मेँ केवल लालचौक पर तिरंगा फैलाने से कुछ न होगा । इसके लिए हमेँ जम्मू कश्मीर को तीन हिस्सोँ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख मेँ बाटना होगा । जिसके लिए हमे अमरनाथ श्राईन बोर्ड आंदोँलन की तर्ज पर एक दीर्घकालिक योजना बद्ध उग्र आंदोँलन छेडना होगा । जिसे जम्मू और लद्दाख सम्भाग के निवासी शुरु करेँ और शेष भारत के नागरिक उसका सभी तरह से समर्थन करेँ । जम्मू कश्मीर के तीन हिस्सोँ मेँ बटते ही अनुच्छेद 370 अपने आप हट जायेगा तथा वहाँ पर देशद्रोहियोँ को मुँह की खानी पडेगी । यह भारत के दीर्घकालिक हित मेँ हैँ, इसके अतिरिक्त जम्मू कश्मीर मेँ भारतीय एकता का दूसरा कोई स्थाई विकल्प नहीँ हैँ ।
वन्दे मातरम्
विश्वजीत सिंह 'अनंत'

2 टिप्‍पणियां:

  1. मैँ आपके विचार से सहमत हूँ , जम्मू कश्मीर को तीन भागोँ मेँ विभाजित किये बिना वहाँ पर भारतीय हित सुरक्षित नहीँ रह सकते ।

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  2. kashmir mein koi muslim nahi tha. Ye sab kashmiri pandit the jo zabardasti muslim banaye gaye.
    Sabse pehle artcl 370 ko hatana h phir pok ko vapas lena h. Iske liye INDIA ko ekjut hona h.
    Vande matram

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