बुधवार, 15 दिसंबर 2010

अखण्ड भारत के स्वप्न द्रष्टा - वीर नाथूराम गोडसे भाग - 3



पिछले दो भागोँ मेँ आपने श्री नाथूरामजी गोडसे द्वारा गांधीजी का वध करने के प्रमुख कारणोँ को पढा,अब आगे ......
वास्तव मेँ मेरे जीवन का उसी समय अन्त हो गया था जब मैने गांधी वध का निर्णय लिया था । गांधी और मेरे जीवन के सिद्धांत एक है, हम दोनोँ ही इस देश के लिए जीये,गांधीजी ने उन सिद्धांतोँ पर चलकर अपने जीवन का रास्ता बनाया और मैने अपनी मौत का । गांधी वध के पश्चात मैँ समाधि मेँ हूँ और अनासक्त जीवन बिता रहा हूँ ।
मैँ मानता हूँ कि गांधीजी एक सोच है, एक संत है, एक मान्यता है और उन्होँने देश के लिए बहुत कष्ट उठाए । जिसके कारण मैँ उनकी सेवा के प्रति एवं उनके प्रति नतमस्तक हूँ, लेकिन इस देश के सेवक को भी जनता को धोखा देकर मातृभूमि के विभाजन का अधिकार नही था । किसी का वध करना हमारे धर्म मेँ पाप है, मै जानता हूँ कि इतिहास मेँ मुझे अपराधी समझा जायेगा लेकिन हिन्दुस्थान को संगठित करने के लिए गांधी वध आवश्यक था । मैँ किसी प्रकार की दया नही चाहता हँ । मैँ यह भी नही चाहता कि मेरी ओर से कोई और दया की याचना करेँ ।
यदि देशभक्ति पाप है तो मैँ स्वीकार करता हूँ कि यह पाप मैने किया है ।यदि पुण्य है तो उससे अत्पन्न पुण्य पर मेरा नम्र अधिकार है । मुझे विश्वास है कि मनुष्योँ के द्वारा स्थापित न्यायालय के ऊपर कोई न्यायालय हो तो उसमेँ मेरे काम को अपराध नही माना जायेगा । मैने देश और जाति की भलाई के लिए यह काम किया ! मैने उस व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीतियोँ के कारण हिन्दुओँ पर घोर संकट आये और हिन्दू नष्ट हुए !!
मेरा विश्वास अडिग है कि मेरा कार्य ' नीति की दृष्टि ' से पूर्णतया उचित है । मुझे इस बात मेँ लेशमात्र भी सन्देह नही की भविष्य मेँ किसी समय सच्चे इतिहासकार इतिहास लिखेँगे तो वे मेरे कार्य को उचित आंकेगे ।
मोहनदास गांधीजी की हत्या करने के कारण नाथूराम गोडसेजी एवँ उनके मित्र नारायण आपटेजी को फाँसी की सजा सुनाई गई थी । न्यायालय मेँ जब गोडसे को फाँसी की सजा सुनाई गई तो पुरुषोँ के बाजू फडक रहे थे, और स्त्रियोँ की आँखोँ मेँ आँसू थे । नाथूराम गोडसे व नारायण आपटे को 15 नवम्बर 1949 को अम्बाला (हरियाणा) मेँ फासी दी गई । फाँसी दिये जाने से कुछ ही समय पहले नाथूराम गोडसे ने अपने भाई दत्तात्रेय को हिदायत देते हुए कहा था, कि
" मेरी अस्थियाँ पवित्र सिन्धू नदी मेँ ही उस समय प्रवाहित करना जब सिन्धू नदी एक स्वतन्त्र नदी के रुप मेँ भारत के झंडे तले बहने लगे, भले ही इसमेँ कितने भी वर्ष लग जायेँ, कितनी ही पीढियाँ जन्म लेँ, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना ।"
श्रीनाथूराम गोडसे ने तो न्यायालय से भी अपनी अन्तिम इच्छा मेँ सिर्फ यही माँगा था - " हिन्दुस्थान की सभी नदियाँ अपवित्र हो चुकी है, अतः मेरी अस्थियोँ को पवित्र सिन्धू नदी मेँ प्रवाहित कराया जाए ।"
वीर नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे ने वन्दे मातरम् का उद्घोष करते हुये फाँसी के फंदे को अखण्ड भारत का स्वप्न देखते हुये चुमा और देश के लिए आत्म बलिदान दे दिया ।
नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे के अन्तिम संस्कार के बाद उनकी अंतिम इच्छा को पूर्ण करना तो दूर उनकी राख भी उनके परिवार वालोँ को नहीँ सौँपी गई थी । जेल अधिकारियोँ ने अस्थियोँ और राख से भरा मटका रेलवे पुल के ऊपर से घग्गर मेँ फेँक दिया था । दोपहर बाद मेँ उन्ही जेल कर्मचारियोँ मेँ से किसी ने बाजार मेँ जाकर यह बात एक दुकानदार को बताई, उस दुकानदार ने तत्काल यह सूचना स्थानीय हिन्दू महासभा कार्यकर्ता इन्द्रसेन शर्मा तक पहुँचाई ।इन्द्रसेन उस समय ' द ट्रिब्यून ' के कर्मचारी भी थे । इन्द्रसेन तत्काल अपने दो मित्रोँ को साथ लेकर दुकानदार द्वारा बताये गये स्थान पर पहुँचेँ । उन दिनोँ घग्गर नदी मेँ उस स्थान पर बहुत ही कम पानी था । उन्होँने वह मटका वहाँ से सुरक्षित निकालकर प्रोफेसर ओमप्रकाश कोहल को सौप दिया, जिन्होँने आगे उसे डाँ. एल वी परांजये को नाशिक मेँ ले जाकर सुपुर्द किया । उसके पश्चात वह अस्थिकलश 1965 मेँ नाथूराम गोडसे के छोटे भाई गोपाल गोडसे तक पहुँचाया गया, जब वे जेल से रिहा हुए । वर्तमान मेँ यह अस्थिकलश पूना मेँ उनके निवास पर उनकी अंतिम इच्छा पूरी होने की प्रतिक्षा मेँ रखा हुआ है ।
15 नवम्बर 1950 से अभी तक प्रत्येक 15 नवम्बर को महात्मा गोडसे का " शहीद दिवस " मनाया जाता है । सबसे पहले नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे के चित्रोँ को अखण्ड भारत के चित्र के साथ रखकर फूलमाला पहनाई जाती है ।उसके पश्चात जितने वर्ष उनके आत्मबलिदान को हुए है उतने दीपक जलाये जाते है और आरती होती है । अन्त मेँ उपस्थित सभी लोग यह प्रतिज्ञा लेते है कि वे महात्मा गोडसेजी के " अखण्ड हिन्दुस्थान " के स्वप्न को पूरा करने के लिये काम करते रहेँगे । हमे पूर्ण विश्वास है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश एक दिन टुकडे- टुकडे होकर बिखर जायेगे और अन्ततः उनका भारत मेँ विलय होगा और तब गोडसेजी का अस्थिविर्सजन किया जायेगा ।
हमेँ स्मरण रखना होगा कि यहूदियोँ को अपना राष्ट्र पाने के लिये 1600 वर्ष लगे, प्रत्येक वर्ष वे प्रतिज्ञा लेते थे कि अगले वर्ष यरुशलम हमारा होगा । इसी प्रकार हमेँ भी प्रत्येक 15 नवम्बर को अखण्ड भारत बनाने की प्रतिज्ञा लेनी चाहिये ।
मेरा यह लेख लिखने का उद्देश्य किसी की भावनाओँ को ठेस पहुँचाना नहीँ, बल्कि उस सच को उजागर करना है, जिसे अभी तक इतिहासकार और भारत सरकार अनदेखा करती रही है । गांधीजी के बलिदान को नही भूला जा सकता है तो गोडसेजी के बलिदान को भी नही ।
वन्दे मातरम्
विश्वजीत सिंह 'अनंत'

25 टिप्‍पणियां:

  1. विश्वजीत भाई क्या कहूँ वो घग्गर नदी मैं अस्थि कलश फेंके जाने वाली बात पढ़ कर इतना बुरा लगा मन कर रहा है उन सूअर के पिल्लों की गर्दनें उतार लूँ जिन्होंने पहले अंतिम इच्छा पूछ कर इतना अपमान किया हिन्दू कुलवीर गोडसे का

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut hi ghrinit kary kiya asthi kalash phek kar. Jo desh ek aadmi ki antim ikchha puri nahi kar sakta wahan aur kya ummeed rakhi jaye.

    उत्तर देंहटाएं
  3. hamara nathhuram ji ko sir zukakar shashtang namaskar

    उत्तर देंहटाएं
  4. i believe in philosophy of Great Godsey....i believe in Godsey, sometime i think if i could be Godsey....wat so ever he did was for one india....every muslim is not anti indian and every move of Ghandhi ji's was'nt in favour of india...Jinha bruttally cut pff a shoulder of india and Ghandhi was going to award his state with money while mr.Godsey stopped him for ever....a tru patriot

    उत्तर देंहटाएं
  5. हम इस माहन क्रांतिकारी युवा प्रेरणा स्रोत हुतात्मा की आत्मा को वचन देते हैं इ उनकी अंतिम इक्षा अवश्य पूर्ण करेंगे | हिन्दुकुश पर्वत से हिन्दू महोदधि तक अखंड हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करके इस महानक की अस्थियों को सिन्धु नदी में प्रवाहित करेंगे |

    उत्तर देंहटाएं
  6. महात्मा नाथूराम गोडसे ने जो किया वह उस समय की आवश्यकता थी भले ही आज हम इसे किसी भी रूप मेँ लेँ । महात्मा गोडसे ने देश के लिए गांधी वध के अलावा ओर भी बहुत सारे अच्छे काम किये थे । पूज्य महात्मा गोडसे जी ने छुआछुत और समाज मेँ फैली अन्य कुरीतियोँ के विरूद्ध भी जंग लडी थी । ऐसे महान क्रान्तिकारी के अस्थिकलश का भारत के झंडे तले बहने वाली सिन्धू नदी अर्थात अखण्ड भारत की सिन्धू नदी मेँ विसर्जन न किया जाना हम भारतीयोँ के लिए बडे ही दुःख और शर्म की बात हैँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. i trully salute mahatma godse.aapne jo kiya vo bilkul sahi tha .i did not know the realty before read this article.u r really owsome.

    उत्तर देंहटाएं
  8. गांधी जी के बारे में अधिक सच्चाई जानने के इच्छुक प्रिय मित्रों महान साहित्यकार गुरूदत्त का साहित्य , गोडसे जी की पुस्तक गांधी वध क्यों , सत्यान्वेषी स्वामी शिवानन्द की पुस्तक गांधी और नेहरू भारत के लिए वरदान या अभिशाप आदि देश - विदेश के प्रमाणित लेखकों की पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. Bahot bhari ..
    Nathuram JI Godse Aur Narayan Ji Apte ji Ki jay..

    Wo Amar rahe

    उत्तर देंहटाएं
  10. भाइयों अगर आप लोग अंतरात्मा से मानते हो की नाथूराम गोडसे ने सही किया था तो कसम खाओ की उनके देखे हुए सपने को पूरा कर के ही दम लोगे , मैं कसम खाता हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  11. AAJ MUJHE UNKI YAHA STORY PADH KAR BAHUT HI BURA FEEL HO RAHA HAI..........INN SARI CHEEJO MEIN UNKA KOI SWARTH NAHI THA FIR BHI UNHONE YE SAB KIYA..........SHRI NATHU RAM GODSHE JI AMAR RAHEIN

    उत्तर देंहटाएं
  12. हिन्दुओँ को संगठित करना एक चुनौती भरा कार्य हो चुका है । आज हिन्दू शब्द हिन्दुओँ को ही साम्प्रदायिक लगता है । क्यों यह इतना उदार है कि अपनी प्राचीन परम्परा, धर्म और एकता को मजबूत करने के लिए कार्य करने वालों के साथ खड़ा नहीं होता ?

    उत्तर देंहटाएं
  13. Sat Sat Naman is Mahan Aatma ko.
    Sirf kehne se kuch nahi hoga. Hume Kuch Karna bhi Hoga. Is liye hum aaj hi pritigya le.

    उत्तर देंहटाएं
  14. maine jo kuch bhi padha pahle bahut kam suna tha ise padhne ke baad aaj shri nathuram ghodse ke liye man bahut shradha bhavna badh gai hai.

    उत्तर देंहटाएं
  15. kaun kehta hai ki amar Shaheed Sri Nathuram Gaudse ab jiwit nahi hain, wo to humari anteraatma main base hue hain, maain unka param bhaqt hu, main sindhu nadi ka jal akhand Bharat ke dhwaj tale bahaunga, nahi to apne prano ki aahuti de dunga.
    Jai Maa Bharti
    Vande Mataram

    उत्तर देंहटाएं
  16. Nathuram Godse ne jo bhi kiya sahi kiya

    उत्तर देंहटाएं
  17. i am fully agree with nathu ram godse ,congress aur mahatma gandhi ne is desh ka satyanash kar dala.

    उत्तर देंहटाएं
  18. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  19. गोडसे जी ने वही ...
    किया जो आज के हालात...
    पर अधिकांश युवावर्ग करना चाहता है...
    बचपन से गलत इतिहास की वजह...
    से अब आप मेरे आदर्श मृतुपरांत तक रहेगे...
    जय - हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  20. गोडसे जी ने वही ...
    किया जो आज के हालात...
    पर अधिकांश युवावर्ग करना चाहता है...
    बचपन से गलत इतिहास की वजह...
    से अब आप मेरे आदर्श मृतुपरांत तक रहेगे...
    जय - हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  21. क्या होगा इस देश का सब कुछ गलत हो रहा है, हम सब वो पढ़ाया जा रहा है जो पढ़ने लायक नहीं है। वो दिन कब आयेगा जब हम स्वतंत्र होगें, मेरी समझ में चन्द्रशेखर आजाद ने डकैती डालकर यदि देश को स्वतंत्र कराने की कोशिश की थी तो गलत नहीं किया था उस समय भी आज जैसी की स्थति होगी तभी यह निणर्य लेना पड़ा।
    जय हिंद.............
    sunil shukla

    उत्तर देंहटाएं
  22. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  23. ham sab agar facebook par yah karya kare to jada log hame milenge.

    उत्तर देंहटाएं
  24. सुनील शुक्ल25 जनवरी 2012 को 8:50 pm

    भाई फेसबूक का प्रयोग तो सिर्फ अपनी फोटो दिखाने के लिए हो रहा है, उस पर इन लेखों क शायद कोई मतलब नहीं है। "द प्लानेट" डिस्कवरी चैनल पर एक कार्यक्रम दिखाता है। उसमें दिखाया है कि अगले 15,000 सालों के अन्दर दुनिया को एक बहुत बड़ा अकाल देखना पड़ेगा क्योंकि पृथ्वी के अन्दर ध्रुव अपने आप लगभग सात लाख वर्षों के पशचात् दिशाएं बदल रहें हैं "एसा तब हुआ जब वानर रूपी पूर्वज इस धरती पर थे" यह शब्द भी उसी चैनल के हैं। अब इस बात अपने मित्रों बता कर देखो उनका जबाव भी सूनो "तब तक मैं नहीं रहूगां"। क्या देगें ? हम अपने बच्चों के बच्चों को कोई नहीं समझ रहा है। परन्तु ईशवर ने अपना काम चालू कर रखा है एक दिन इसको बदलेगें, आने वाले समय पर हम सच्चा इतिहास बच्चों को पढ़ाएगें।

    उत्तर देंहटाएं

मित्रोँ आप यहाँ पर आये है तो कुछ न कुछ कह कर जाए । आवश्यक नहीं कि आप हमारा समर्थन ही करे , हमारी कमियों को बताये , अपनी शिकायत दर्ज कराएँ । टिप्पणी मेँ कुछ भी हो सकता हैँ , बस गाली को छोडकर । आप अपने स्वतंत्र निश्पक्ष विचार टिप्पणी में देने के लिए सादर आमन्त्रित है ।